26/05/2020. P/69

हिन्दी/
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दीवाली के दिन सभी कुटियों में लड़कों की संख्या के अनुसार सभी कुटीयो के कैप्टन को उनके कुटी में लड़कों की संख्या के अनुसार दो - दो मोमत्तियां और एक - एक अगरबती का पैकेट से दिया जाता। और कैप्टन को पटाखों और फुलझड़ी का एक- एक पैकेट दे दिया जाता जो कुटी में रहने वाले सभी लड़कों कि उपस्थिति में शाम के समय बजाना होता है। ये कैप्टन के उपर निर्भर करता है। कि वो सभी लड़कों को पटाखे हिसाब से बाटे या खुद ही सबके सामने पटाखे फोड़े शाम के समय लक्ष्मी पूजा से स्टार्ट होता फिर खिल बतासे बट जाते। और खाने मै मटर पनीर की सब्जी और पूरी। ईद के दिन मॉर्निंग में सेवैया और पूरी सब्जी २६ जनवरी और १५ अगस्त तो स्कूल में ही मनाया जाता हा मिठाई होम जरूर बाटी जाती। होम में बनाए जाने वाले त्योहार थे। दीवाली,  दशहरा,  होली,  ईद, कृष्नजनमस्टमी,  गणतंत्र दिवस,  स्वतंत्रता दिवस, धीरे धीरे होम में लड़कों की संख्या कम होती जा रही थी। और ६ से लेकर ८ तक के क्लास का एग्जाम भी स्टार्ट होने वाला था। टीचर से सभी स्टूडेंट कौन - कौन से प्रशन आयेगे इसका हिंट पूछने में लगे थे। टीचर प्रशन तो नहीं बताते थे। इतना जरूर कहते जितना पढाया है। उतने में से ही आयेगा उसके बाहर से कुछ नहीं आयेगा। ज्यादा जिद करने पर बोलते थे कि ये- ये चैप्टर पर लेना इसमें से ज्यादा आयेगा। और कभी - कभी तो कहते मै हिंट बता दे रहा हूं । उसी प्रकार प्रशन आयेगे।









English translate/
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 On the day of Diwali, according to the number of boys in all the kutis, the captain of all the kutiyos was given two - two waxes and one incense packet according to the number of boys in their kutis.  And the captain would be given one packet of firecrackers and sparklers which would have to be played in the evening in the presence of all the boys living in the hut.  It depends on the captain.  That he would distribute all the boys according to the firecrackers or the firecrackers in front of everyone themselves would start with Lakshmi Puja in the evening and then they would blossom.  And eating pea cheese vegetable and puri.  On the day of Eid, Sevaiah and the whole vegetable is celebrated in the school on January 24 and August 15, and sweets are definitely distributed at home.  There were festivals made at home.  Diwali, Dussehra, Holi, Eid, Krishnjanamastami, Republic Day, Independence Day, the number of boys in the home was gradually decreasing.  And class exams from 7 to 4 were also going to start.  All the students were engaged in asking the question of which questions would come from the teacher.  The teacher did not tell the question.  They have definitely said as much as they have taught.  Out of that, nothing will come out of it.  On insisting more, he used to say that taking this chapter will come out of it.  And sometimes I say I am telling a hint.  Questions will come in the same way.







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