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लोटस टेंपल टूर 24/12/2020. P/122

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                       लोटस टेंपल टूर  //////// टेंपल से निकल कर हमारे ग्रुप ने साइड के ही एक पार्क में खाना खाया और उसके बाद हमारा अगला घूमने का स्थान था राजघाट सभी छात्र के एक साथ आ जाने के बाद हम सभी फिर से स्कूल बस में बैठ कर राजघाट के लिए चल दिए। राजघाट पहुचने के बाद सभी लोग बस से उतरकर एक जगह रुक गए फिर टीचर ने बताया कि यहां पर गांधी जी कि समाधि है। उसके बाद हम लाइन लगकर राजघाट पार्क में प्रवेश कर गए उसके बाद फिर तो को रूल नहीं हम लोग सबसे पहले स्कूल के टीम से अलग हुए। हम सभी दोस्त एक जगह रुक गए जब सभी छात्र आगे निकल गए टीचर के साथ तो हम लोग राजघाट में बिल्कुल अंदर कि तरफ़ चले गए जहां छोटे छोटे तालाब बने हुए थे और बत्तख तैर रही थी तालाब मै कुछ कमल के फूल भी खिले थे। जो देखने में अत्यनंत मोहक लग रहे थे। और तरह तरह के डिज़ाइन के चित्र करी फूलो से कि गई थी छोटे छोटे पौधों को डिज़ाइन से काटा गया था। जो देखने में बहुत ही सुन्दर लग रहे थे। हम तीन दोस्त साथ होकर घूमने लगे कुछ देर तक घूमने के बाद हम तीनो दोस्त बापू कि समाधि के पास बैठ कर बापू कि समाधि पर फूल अर्पण करने वालो को देखने तभी

30/11/2020. P/121

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 हिन्दी/ /////// लोटस टेंपल के अन्दर शोर करने के कारण वहा के स्टॉफ ने हम लोगों को जल्दी है बाहर निकाल दिया लेकिन बाहर निकाले जाने का अफ़सोस हम मै से किसी को नहीं था। हम स्कूल दोस्तो ने एक ग्रुप बना लिया जिसमे मै, दीपक, पवन , स्वराज, संजय, शोरभ, दिलीप थे। हम टेंपल से बाहर निकलने वाले रोड पर चलने लगे हमारे आगे लड़कियों का काफिला, झुंड चल रहा था। और दिलीप बगल से निकल कर मेरे पीछे आ गया मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि दिलीप क्या करने वाला है दिलीप ने मेरे बगल से हाथ आगे करके मेरे आगे चल रही लड़की की चोटी खीच दी और हाथ तुरन्त पीछे कर लिया उस लड़की ने पीछे मुड़ कर घुर कर मुझे देखा मै अपना सर ना में हिलाया फिर से हम लोग चलने लगे दिलीप ने फिर से मेरी बगल से हाथ ले जाकर मेरे आगे चल रही लड़की कि चोटी फिर से खीच दी और हाथ तुरन्त पीछे कर लिया इसबार लड़की ने झगड़ा करने के लिए गुस्से से पीछे मुड़ कर मुझे देखा मेरी तो सासे अटक गई अब थप्पड़ पड़ने वाला है और हमारे थोड़ी दूर पर ही लेडी कॉन्स्टेबल पाइप का डंडा लेकर खड़ी थी। उससे पीटने का दर और पुलिस वाले भी थे। उनका भी डंडा याद आया साथ ही स्कूल कि बदना

18/11/2020. P/120

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 हिन्दी/ /////// फब्बारे के अंदर लोग एक रुपए और दो रुपए के सिक्के उछाल के डाल देते थे। और पानी साफ था। जिसके कारण फब्बारे के तल में  में बहुत सारे सिक्के दिख रहे थे। लेकिन स्कूल के लडके कहा मानने वाले थे। एक लडके ने आस- पास देखा जब स्टाफ टैंपल और अध्यापक कि नजर नहीं पड़ रही थी। तो तुरन्त सिक्के निकालने के लिए पानी में हाथ डाला लेकिन सिक्के बहुत नीचे थे जिसके कारण उस सिक्के नहीं मिले ये समझते देर नहीं लगी कि अपवर्तन के कारण सिक्के पानी में बहुत उपर दिख रहे है। जबकि वो बहुत नीचे थे। उसके बाद किसी ने सिक्के निकालने कि कोशिश नहीं कि क्योंकि सभी को पता चल गया कि कोशिश करना ब्यर्थ है। और सिक्के भी नहीं मिलेगा और अध्यापक के देखने पर पिटाई अलग से होगी। हमारे आगे कि ग्रुप लड़कियों को ग्रुप था। ओ भी किसी स्कूल से थी लेकिन उनका ड्रेस स्कूल वाला नहीं था। उसके बाद हम सभी लोग लोटस टैंपल के अंदर गए। जो कि बहुत बड़ा हॉल था। किसी ने कहा कि अगर कोई आवाज करेगा तो आवाज गुजेगी तो बस बताने कि देर थी। शुरुआत किसी एक ने ट्राई से किया तो सच - मुच में आवाज गुजी फिर तो हर कोई अपनी आवाज कि गुज सुनाई देने के लिए अ

31/10/2020. P/119

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 हिन्दी/ /////// स्कूल में सबसे बड़ा और मजेदार दिन होता था। जब स्कूल कि तरफ़ से दिल्ली घूमने या टूर पर जाते थे तब तो दोस्तो के संग मौज मस्ती की कोई सा ही नहीं होती थी। खास कर मेरे कमिने ,पागल दोस्त ऎसी हरकते करते थे। की हसी रुकने का नाम ही नहीं लेती। आठवीं क्लास से जब मै मेरे दोस्तो के साथ टूर पर गया। तो मै और मेरे दोस्तो ने लड़- झगड़ कर खिड़की वाली सीट ली। और बस चल पड़ी किसी को नहीं पता था कि कहा जा रहे है। अध्यापक ने कहा कि हम लोग कहा का रहे है यह एक आश्चर्य है। जब हम लोग मजनू के टीला के पास ट्रैफिक होने की वजह से रुके तो क्लास के लडको ने पास से ही जाते छक्के को बोला डार्लिंग चल रही है क्या इस बात पर छक्के ने खूब गाली दिया वो गाली बकता था जब तक स्कूल बस चली नहीं गई। कुछ देर बाद बस रुकी तो पता चला कि हम लोग लोटस टेंपल घूमने आए है। उसी दिन और भी स्कूल के टूर आए थे जिसमे लडके और लड़कियां भी थी ये देख के क्लास के लडके तो बोले ठीक जगह आए है। जो कुछ देर पहले बोल रहे थे कि बहुत बोरिंग सी जगह है। अध्यापक ने कहा सभी लोग लाइन में चलेंगे एक दूसरे का हाथ पकड़ कर। सभी ने हा में सर हिलाया सभी स्टू

2/10/2020. P/118

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 हिन्दी/ /////// शुभाशिका जो होम के अंदर ओपन स्कूल चलाती थी। उनके द्वारा दिया गया ८या १० पास का सर्टफिकेट गवर्नमेंट स्कूल में भी मान्ताप्राप्त था। मेरी तो दुश्मनी थी शुभाशिक वालो से क्योंकि मै ५ कक्षा से पड़ते हुए ८वी कक्षा मै पहुंचा था। और सभी कक्षा पास किया था।  ५ साल लगे थे ८ वी कक्षा मै पहुंचने के लिए लेकिन शूभाशिका वालो ने उन लडको को भी ८ वी पास करा दिया जो ठीक से हिन्दी भी पड़ता नहीं जानते थे। मेरी उनसे दुश्मनी इस लिए नहीं थी कि शुभाशीका वालो ने ओपन से विद्यर्थियों को सभी को उच्च कक्षा मै पहुंचा दिया था। बल्कि इसलिए थी की शुभशिका वाले पहले क्यो नहीं आए। और सबसे आश्चरयजनक ये था कि सभी विद्यार्थियों के सर्टिफिकट में ८० परसेंट से उपर नंबर थे। शूभशिका वालो ने सभी विद्यर्थियों का ९ में दाखिला दिलाना चाहा लेकिन प्रधानाचार्य ने मना कर दिया और कहा कि मै टेस्ट लुगा अगर पास हुए तो एडमिशन लूगा नहीं तो सभी को ९ से नीचे की कक्षा में दाखिला मिलेगा जब प्रधानाचार्य ने टेस्ट लिया तो सभी फेल हो गए और सभी को ८ वी कक्षा मै एडमिशन लिया और ८ वी में मै भी था। जो शुभशीका से आए थे। उनको ८ वी कक्षा के ब्ल

29/09/2020. P/117

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 हिन्दी/ //////// बात उस समय की है जब हॉलीवुड फिल्म अवतार सिनेमा हॉल में लगने वाली थी उसके ट्रेलर टीवी पर खूब दिखाए जा रहे थे। उसके साथ एक और फिल्म भी रिलीस हो रही थी। जिसका नाम 'paa' था। उसका ट्रेलर बहुत ही कम दिखाए थे लगभग ना के बराबर होम कि तरफ़ से सभी लडको को फिल्म दिखाने का प्लान बनाया गया। और फिल्म का दिन भी वही चुना जिस दिन अवतार रिलीज़ होने वाली थी। हम सभी को तो उस दिन का बड़ा बेसब्री से इंतेज़ार था। अवतार फिल्म का नाम ले ले के मज़े लेते कि अवतार देखने जायेगे किसी तरह से दिन बीत गए और वो दिन आ गया जिस दिन अवतार देखने जाना था। जो लडके सुबह में ७-८ बजे उठते थे वो भी उस दिन ४ बजे ही उठ कर नहा कर न्यू कपड़े पहन कर तैयार थे। और जो सो रहे थे उन्हें परेशान करने लगे। औरो की बात छोड़ो मै खुद नहा कर कपड़े पहन कर सो रहा था। ताकि कोई दिक्कत ना हो बाद में बेड से उठो और चल दो। सुबह ९ बजे बस आती और अवतार फिल्म का नाम रटते बस में बैठते है और चल देते है। सिनेमा हॉल के बाहर अवतार फिल्म का ट्रेलर वाला बोर्ड लगा था। हमारे वाले शो का टाइम १२:३० का था। उससे पहले कई प्रोग्राम हुए डांसिंग और स

11/09/2020. P/116

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 हिन्दी/ /////// अलीपुर फस्ट होम में एक बहुत पुरानी लाईब्रेरी भी है। जिसमे बहुत सारी किताबें रखी है। उसमे लडके बहुत कम जाते थे। लाईब्रेरी को संभालने का जिम्मा गुलाब सर को था वो कभी लाईब्रेरी खोलते ही नहीं थे। अगर खोलते भी थे तो सप्ताह में एक बार वो भी साफ़ - सफाई के लिए मैंने गुलाब सर से बात किया तो वो लाईब्रेरी खोलते के लिए मान गए लेकिन उन्होंने कहा कि लाईब्रेरी खोलने पर तुम्हे सफाई करनी पड़ेगी अगले दिन से लाइब्रेरी खुलने लगा लाइब्रेरी देखने के बाद व सभी रेक चेक करने के बाद पता चला कि लाईब्रेरी स्वर्ग के सामान थी। जो बुक मै चाहता था। सब उसमे थे १९७० के समय की बुक भी थी। सभी बुक काफी अच्छी हालत में थीं। सभी पुरानी पत्रिका भी थी। सभी विख्यात लेखकों के किताब कि पूरी की पूरी सीरीज थी। मुंशी प्रेमचन्द द्वारा रचित सभी उपन्यास सीरीज के साथ थे उनके द्वारा रचित उपन्यास गोदान भी थी। लाईब्रेरी में राखी हर बुक न्यू सी लग रही थी क्योंकि कोई भी उनको पड़ता नहीं था उनके उपर धूल जमी थी। पुरानी कॉमिक्स से लेकर न्यू नंदन , चंपक , नन्हे सम्राट,  यहा तक की पुराने समाचार पत्र भी थे । पुरानी बुक जिनमें फ्यू

29/08/2020. P/115

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 हिन्दी/ /////// आर्ट एंड क्राफ्ट क्लास में डिज़ाइन कैसे करते है ये सीखाया जाता था। इस क्लास कि टीचर लेडीज टीचर थी। नाम तो मै भूल चुका हूं लेकिन सायद उनका नाम अर्चना था। सिम्पल और सीधी स्वभाव कि थी।  सुरूआत में हमें लिफाफा कैसे बनाते है ये सीखाया गया लेकिन फिर मौसम और त्यौहार के हिसाब से हमें सजावटी सामान या यूं कहे कि झालर झूमर और रंगीन कागज कैसे काटते है। कागज को कैसे फोल्ड करके काटे तो उसमे कौन सी पिक्चर या किस प्रकार का डिज़ाइन बनेगा ये करने मै मज़ा भी बहुत आता था और और टीचर बहुत से रंगीन कागज खरीद कर लाती थी। और कटिंग हम लोग करते थे। दीवाली के समय रंग बिरंगे झूमर - झालर बनाते थे। सबसे पसंदीदा डिज़ाइन जो मुझे बनाने मै लगता था। रुपए का सिंबल और किसी देवी- देवता का चित्र और डालर का चित्र और भी कई प्रकार के डिज़ाइन मै रंगीन कागज पर काट सकता हूं। होली के त्यौहार के समय फूलों को सुखाकर उनसे कलर बनाना और राखी के समय राखी बनाना और उसे मार्केट में बेच कर जो पैसे मिलते थे उनमें बनाने वालो को भी दिया जाता था फैशनेबल कागज के बैग बनाना आदि सब सामिल था। इस कोर्स का भी सर्टिफिकट दिया जाता था मुझ

21/08/2020. P/114

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 हिन्दी/ /////// अगली क्लास के बारे में बताता हूं। वो थी वैल्डिंग क्लास जिसके टीचर ठाकुर जी थे। उनका पूरा नाम तो मै भूल गया हूं। लेकिन सभी होम के स्टाफ और लडके उन्हें ठाकुर जी कहकर बुलाते थे। वो होम के सबसे वरिष्ठ स्टाफ में से एक थे। यहां तक कि सुप्रिदेंट से भी ज्यादा उनकी सैलरी होती थी। लेकिन पोस्ट में सुप्रिडेट से नीचे थे। वे वैल्डिंग सिखाते थे। एक वीक में सिर्फ एक ही बार क्लास लगती थी। ज्यादा तर उनकी क्लास बंद ही रहती थी। अगर क्लास खुलती भी थी तो कोई जाता भी नहीं था। एक बार मै गया उनके पास कि सर मुझे भी वैल्डिंग सीखनी है तो ठाकुर सर ने मुझसे पूरा क्लास साफ़ करवाया और अगले दिन से आने को कहा जब मै अगले दिन गया तो फिर से मुझसे क्लास साफ़ करवाया और अगले दिन फिर आने को कहा अगले दिन मै फिर गया तो फिर क्लास साफ़ करवाया और अगले दिन आने को कहा लेकिन कुछ भी नहीं सिखाया उसके बाद मै दुबारा क्लास में नहीं गया उनकी और मुझे समझ में आ गया कि और लडके उनकी क्लास में क्यो नही जाते वैल्डिंग सीखने के लिए। हाईट उनकी छोटी थी। और वो हमेशा साइकल से आते थे। उनके पैर साइकल पर पूरा नहीं पहुंच पाता था। उनको चिढ

14/08/2020. P/113

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  हिन्दी/ ///////// टीचर बताते हैं कि जब वे साउदी अरब में थे तो वहा घर बनाने की एडवांस मशीन थी। जिन मशीनों को अब यहां देखते है वहा ये मशीन पहले से थी यहां के लिए ये मशीन न्यू है लेकिन अब सउदी में इनको छोड़ कर इससे भी एडवांस मशीन यूज कर रहे है। उनसे कम से कम हम लोग २० साल पीछे है। हुंडई कम्पनी के बारे में बताते है कि ये कम्पनी इंडिया में मात नहीं खाएगी ये कम्पनी सुई से लेकर बड़े बड़े मशीन तक बनाती है और लोगो के जरूरत को समझती है। अब यहां आयी है। जो टेक्नोलॉजी यहां के लिए नयी है वहा ये यूज नहीं करते अब वहा घर वीक - वीक में बन जाते है। वहा कमाई पर टेक्स नहीं लगता जितना कमाओ पूरा का पूरा घर ला सकते हो वहा का कानून हाथ के बदले हाथ और आख के बदले आंख है। अगर कोई बलात्कार करता पकड़ा गया तो उसे पत्थर मारकर मारते है पत्थर तब तक मारते है जब तक वो मर नहीं जाता और वह चोप - चोप चौराहा है जहा गर्दन काटते है वहा एक हप्ते में कोर्ट का फैसला हो जाता है। वहा औरतों के लिए बहुत सख्त कानून है। दिन में तो सब ठीक दिखता है लेकिन रात होते ही वहा के बाजार सज जाते है। सर ने हम पाइप कि चूड़ी कैसे बनते है पाइप कैसे

10/08/2020. P/112

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हिन्दी/ /////// होम में और भी कई प्रकार के क्लास लगती थी। ये सभी क्लास जब गर्मी को छुट्टियां होती थी तब लगती थी। क्लासे के नाम थे। आर्ट एंड क्राफ्ट , प्लंबर , स्किल डवलपमेंट , मोबाईल रिपेयरिंग , अंब्रॉड्ररी , सिलाईं क्लास , ये क्लासेज सुबह से लेकर शाम तक चलती थी हर क्लास दो - दो घंटों की होती थी। हर क्लास में सात या आठ स्टूडेंट्स होते थे। कई क्लासेज की टाईमिंग सेम हो जाती थी। तो टीचर आपस में डिस्कस करके मैनेज करते थे। हम लोग भी जिस दिन जिस क्लास का टेस्ट होता उसमें नहीं जाते और टेस्ट देने वाले लडको से टीचर ने क्या - क्या पूछा ये पता कर लेते और अगले दिन तैयारी करके जाते लेकिन टीचर प्रशन बदल देते थे। आर्ट एंड क्राफ्ट में हमें एनवेलप कैसे बनते है। पेपर बैग कैसे बनते है , झूमर कैसे बनाते , सजावट कैसे करते है। रंगोली बनाना , ड्रॉइंग बनाना , राखी बनाना , नेचरल कलर बनाना , लाकेट  बनाना,  आदि सब सिखा होम में टैटू मशीन से कैसे बनाते है ये सीखने के लिए आया था लेकिन मैंने नहीं सीखा हा लेकिन विजिटिंग कार्ड और शादी का कार्ड बनाना सीखा लेकिन किसी काम के नहीं। प्लंबर क्लास में हमें घर में पानी कि पाइ

06/08/2020. P/111

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हिंदी/ ////// होम के और कई क्लास से लगती थी। जैसे खाना पकाने की क्लास यानी फ़ास्ट फ़ूड बनाने की क्लास जिसमें कैसे चाउमिन और समोसा, मोमोज, छोले भटूरे,  ब्रेड पकोड़े , चाउमिन रोल, एग रोल, कचौड आदि बनाना सीखाया जाता था। मैने भी सीखने के लिए अपना नाम लिखवा लिया और बनाना भी सीखा लेकिन मैंने खाना पकाने की क्लास सिर्फ खाना खाने के लिए या यूं कहे कि फास्ट फूड खाने के लिए ही ज्वाईन किया था। बनाते कैसे है इसपे मेरा ध्यान कम रहता था। जो भी कुकिंग क्लास में बनता उसे टेस्ट करने की कोशिश जरूर करता। कूकिंग क्लास की खाने की लीस्ट अलग थी। हर रोज अलग - अलग फास्ट फूड बनते थे। चाऊमीन एग़ रोल तो मै हर रोज बनाता था। जो हम लोग कूकिंग क्लास में बनाते वही हम शाम को नाश्ते में लडको को देते थे। ताकि लडके खाके बताए कैसा बना है। कमिने कुछ तो बोलते जैसे कमीनों ने  किसी दूसरी दुनिया का बनाया चाउमिन खा लिया है। कमिने मेरे दोस्त तो चार गाली अलग से देते और खाने के बाद बोलते कि इतना बकवास किसने बनाया है। होम में मेरा एक और शौख था। पूरी फिश फ्राई करना और पूरा चिकेन फ्राइ करना। लेकिन साला कभी भी टिवी में जैसा दिखता था वैस

04/08/2020. P/110

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हिन्दी/ /////// अलीपुर होम दूसरे होम से मेरा ट्रान्सफर अलीपुर के पहले होम में हो गया। पहले होम में जानें के दो हमने के बाद मेरी लड़ाई हो गई जिसकी वजह से मेरी एक आंख काली हो गई बिलकुल पिक्चर्स में जैसा होता है। होम में एक ग्रुप आया (शोकेंदा ) जो कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के अपनी एक ब्रांच अलीपुर होम में खोलना चाहते थे। और होम के लडको को कंप्यूटर हारडवेयर और सॉफ्टवेयर सीखना चाहते थे। शौकीन वालो को इजाजत मिल गई उन्हें स्टडी के लिए एक कंप्यूटर हॉल दे दिया गया जिसमें वे अपने साथ लाए कंप्यूटर और उसके पार्ट रख सकते थे। कुछ दिनों बाद कंप्यूटर क्लास स्टार्ट हो गई कुछ मैंने भी उसमें एडमिशन ले लिए कंप्यूटर डिप्लोमा एक साल का था। कई लड़कों ने क्लास छोड़ दिया लेकिन मै क्लास रोज लेता था। एग्जाम होने के बाद रिजल्ट आया जिसमें मेरे ५१ परसेंट आए थे। मै तो पास हो गया इसी बात की खुशी मना रहा था। क्योंकि कंप्यूटर हार्डवेयर तो समझ लेता था लेकिन कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में सारा ज्ञान सर के ऊपर से निकल जाता था। कुछ समझ में नहीं आता था और मै पड़ता भी नहीं थे। लेकिन एग्जाम में जब प्रैक्टिकल हुआ था जिसमें एक कं