08/05/2020. P/51

हिन्दी/
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इनाम तो सभी कुटी को मिलता लेकिन जो सबसे ज्यादा सुंदर सजी होती थी। उस सांसे ज्यादा मिलता वैसे तो होम में सिटी बजाना मना था। लेकिन उस दिन दिल भर के शोर शराबा होता था सभी लोगो की आलमारी, पेटी , बक्सा, तरह तरह की चीजो से भरा होता था। लड़कों ने कृष्ण जन्माष्टमी को जो नौवें महीने में पड़ता था। उसे नौवा महीना कहते थे और जिसका इंतेज़ार करते थे। उस एक दिन के बीत जाने पर फिर से वही रोज का लड़ाई झगड़ा स्टार्ट हो जाता। किचन के काम में में पूरी तरह निपुण हो गया था। सभी लड़कों के लिए आटा निकालना, चावल, दाल तोल कर अक्सर में निकलता था। एक दिन प्रेम भाईसाहब ने कहा शशि तू बना जा किचन का हेड सारा काम तू करवाएगा खाना बनने से लेकर बटने तक तू देखेगा मै हा भर दिया अगले दिन से काम स्टार्ट होम में सभी लोग मुझे सारीफ समझते थे। समझते क्यों नहीं में कोई गलत काम तो करता नहीं था। सिर्फ भाईसाहब के व ऑफिस वालो की नजरो में सबसे सारिफ था। बाकी लडके सारे जानते थे मुझे मेरे स्वभाव को एक वीक के बाद मै सभी कुटियो में गया और कैप्टन को बोला यार दूध जो पोना ग्लास मिलता है क्यो न उसके स्थान पर आधा ग्लास बिना पानी वाला मिल्क केसा रहेगा। आधा गिलास बिना पानी वाले दूध के लिए लडके राजी हो गए अगले दिन से बिना पानी वाला मीठा दूध पिके सारे राजी हो गए सारे बोलने लगे भाई इसी तरह ठीक है। कम से कम बिना पानी वाला दूध पीने को मिलेगा ।https://myjourney971.blogspot.com/2020/05/08052020-p51.html?m=1









English translate/
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 All the huts would get the reward, but the one which was most beautiful was decorated.  It was forbidden to play the city in the home, much like that.  But on that day there was a heartfelt noise, all the people had their closet, box, box, and were filled with all kinds of things.  The boys took Krishna Janmashtami which was in the ninth month.  It was called the ninth month and used to wait.  After that one day passed, the same daily fight started again.  I was completely adept at kitchen work.  For all the boys, they used to come out often after taking out flour, weighing rice, lentils.  One day, Prem Bhaisahab said, Shashi tu bana ja kitchen head, you will get all the work done, from cooking to cooking, you will see I have filled up, from the next day everyone in the work start home considered me as a whole.  I don't understand why I used to do any wrong thing.  Only in the eyes of Bhaisaheb and office-bearers was the most important.  The rest of the boys knew that I knew my nature after one week. I went to all the cottages and said to the Captain that the milk that I get is pona glass, because instead of that, half a glass of water with no water will be like.  Half glass agreed to fight for water with no water, from the next day, without water, sweet milk was all ready, everyone agreed, all the brothers started talking like this.  At least one will get milk without water.https://myjourney971.blogspot.com/2020/05/08052020-p51.html?m=1






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