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Showing posts from July, 2020

01/08/2020. P/109

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हिन्दी/ /////// ८ वी कक्षा में आने के बाद हमारे कुछ टीचर बदल गए विज्ञान के नए टीचर आए । संस्कृत और इतिहास के भी टीचर बदल गए संस्कृत के लिए उपाध्याय सर को नियुक्त किया प्रिंसिपल ने और और इतिहास के लिए कौशल सर को नियुक्त किया प्रिंसिपल ने उपाध्याय सर पण्डित थे। और वे इतिहास के टीचर थे लेकिन विद्यालय में संस्कृत के अध्यापक की कमी थी। और प्रिंसिपल सर ने उपाध्याय सर से पूछा की क्या आप संस्कृत पड़ा पाएंगे तो उपाध्याय सर ने कहा है मै पड़ा सकता हूं। तो उपाध्याय सर को इतिहास की जगह संस्कृत दे दिया गया। और उपाध्याय सर संस्कृत भाषा पढाने लगे। विद्यालय में उपाध्याय सर को ८ साल हो गए थे और वे १२ से लेकर ९ क्लास तक संस्कृत पढ़ाते थे। लेकिन कुछ टीचर का ट्रान्सफर हो गया थे। जिसकी वजह से उपाध्याय सर को हमारी क्लास भी लेनी पड़ रही थी। ८ वी क्लास में हमारा कला टीचर भी बदल गए थे उनकी जगह जो नए टीचर आए थे। उनका नाम तो मुझे नहीं मालूम लेकिन विद्यार्थी उन्हें ५६ भोग कहते थे। क्योंकि ये उनके डायलॉग में सामिल शब्द था। जब भी किसी को कोई खुराफाती करते देखते तो बोलते कि ले - ले अभी ५६ भोग का आंनद जब परीक्षा आयेगी

30/08/2020. P/108

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हिन्दी/ /////// मस्ती मजाक करते - करते ना जाने कब ७वी क्लास का वार्षिक परीक्षा पास आ गई पता ही नहीं चला। हम सभी अपने अपने काम में लग गए की किसी न किसी तरह से टीचर से हिंट लेना है कि पेपर में क्या - क्या आयेगा ये तो टीचर हमेशा बोलते थे कि जितना विषय में है और उतने में से ही आयेगा उसके बाहर से कुछ नहीं आयेगा लेकिन हम लोग कहा मानने वाले होते थे। किसी न किसी तरह ये पूछ ही लेते कि किस प्रकार के प्रशन आयेगे। लास्ट में टीचर ये बता देते कि इस तरह के प्रश्न आयेगे। साथ ही धमकी भी मिलती कि अगर कोई फेल हो गया तो उसकी खबर मै अलग से लुगा। पेपर ख़तम हुआ और मै और मेरे सभी दोस्त पास हो गए हम सभी ८ थ कक्षा में पहुंच गए थे चमत्कार ये हुआ कि पूरे क्लास में मै सेकेंड आया था इसलिए अजय सर ने मुझे इंग्लिश कि बुक खरीदने के लिए पैसे दिए थे। और वो बुक आज भी मेरे पास है। दिलीप और दीपक लंच लाते घर से मै और संजय होम से लंच ले जाते थे। होम कि रोटी देख के दीपक ये कहता कि भाई तुम लोगो की रोटी को धूप में पत्थर के नीचे रख के सूखा ले और किसी को खींच के मार दे वो मर जाएगा क्योंकि होम कि रोटी बहुत कड़क होती थी। मुझे तो क्ल

27/07/2020. P/107

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हिन्दी/ /////// परीक्षा के टाइम मै , संजय , दीपक , स्वराज, और दिलीप का साथ ही रोल नंबर पड़ता था। और ब्रेंच भी साथ या आस- पास होता था। कभी - दिलीप का नंबर अगले क्लास में पड़ जाता था। हम पाचो मिल कर परीक्षा के उत्तर दिखते थे यू कहे कि किसी एक को भी कोई प्रशन का उत्तर आता होता तो हम सभी को उत्तर मिल जाता था। रोल नंबर के हिसाब से स्वराज मेरे आगे वाली सीट पर बैठता था। संजय मेरी पीछे वाली सीट पर बैठता था। और संजय के पीछे दीपक परीक्षा पेपर के सभी प्रशन के उत्तर हम सभी में से किसी न किसी को तो आता ही होता था। यदि नहीं आता तो साइड वाली डेस्क पे बैठे क्लास के स्टूडेंट से पूछते यदि उनको नहीं आता तो गाइड या फिर कुंजी प्रयोग करते नकल करने में दिलीप सबसे आगे था। वो तो कुंजी भी परीक्षा भवन में ले के आ जाता था। और चेकिंग करने पर भी पकड़ में नहीं आता था। हम नकल करते समय इतनी ज्यादा सावधानी बरतें थे कि टीचर को शक तो होता था लेकिन पकड़ में नहीं आते थे। हमारी परीक्षा कि गाड़ी स्टडी से कम और नकल से ज्यादा चलती थी और जिस दिन किसी कड़क टीचर परीक्षा क्लास में आते उस दिन मातम मनाते क्योंकि नकल नहीं चलती थी। नक

25/07/2020. P/106

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हिन्दी/ /////// प्रिंसिपल को मारने कि धमकी के बाद मै क्लासए चला गया। लेकिन प्रिंसिपल को बात हजम नहीं हुई। अगले दिन प्राथना में प्रिंसिपल ने कहा कल तो एक लडके ने मुझे ही मारने कि धमकी दी इतना इनका हौसला बढ़ गया है। की प्रिंसिपल को धमकी मेरी क्लास को छोड़कर किसी और को नहीं पता था कि मैंने प्रिंसिपल को मारने कि धमकी दी थी। जैसे ही प्रिंसिपल ने मेरा नाम और क्लास साथ में सेक्शन बताया मेरी क्लास के मुझे देखने लगे मैंने भी उनकी तरह अपने पीछे देखने लगा मेरी क्लास वालो को छोड़कर बाकी स्टूडेंट ने सोचा कि जिसके बारे में प्रिंसिपल बोल रहा है। वो लड़का आज स्कूल नहीं आया। आया और मै बच गया। दूसरी बार एक लडके ने मुझे थप्पड़ मार दिया तो मैंने उसे अपनी क्लास जो को सेकेंड फ्लोर पर था। क्लास की खिड़की से बाहर लटकाया था वो तो खिड़की छोटी पड़ गई और वो आधा ही बाहर लटक गया। उस दिन के बाद तो किसी ने मुझे क्लास में तंग या लड़ाई करने कि कोशिश नहीं की लेकिन एक दिन एक नया लड़का आया और उसे मेरी ही सीट चाहिए था। मैंने मना कर दिया लेकिन वो मानने वाला ही नहीं था। कमिने ने स्कूल की छुट्टी के समय मुझे मारने के लिए गेट प

23/07/2020. P/105

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हिन्दी/ एक दिन की बात है मै क्लास में बैठा हुआ था । और किसी विषय का काम कर था। तभी साइड के डेस्क पर बैठा एक लड़का जिसका नाम मुझे ठीक से याद नहीं है। उसने उपर से मेरा पेन पकड़ कर हिला दिया जिससे मेरी पूरी कॉपी का पेज खराब हो गया। जब मैंने उससे कहा कि ये तूने क्यो किया तो उसने मुझे ही अकड़ दिखने लगा क्योंकि मै क्लास में सबसे सारिफ तो नहीं पर शान्त स्वभाव का था। उसने मेरा कॉलर पकड़ कर मारने कि धमकी दिन लगा मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने एक घुसा कस कर उसे से मारा वो रोने लगा और रोते - रोते प्रिंसिपल के पास पहुंच गया। प्रिंसिपल ने मुझे बुलाया और मै चला गया। की गलती मेरी नहीं है तो मुझे सजा नहीं मिलेगी या प्रिंसिपल सर मुर्गा बना कर थोड़ी देर बाद छोड़ देगे प्रिंसिपल ऑफिस में पहुंचते ही प्रिंसिपल उठ खड़ा हुआ और अपनी अलमारी खोली अलमारी में से उसने एक डेढ़ हाथ का डंडा निकला जिसमे तेल लगा हुआ था। देख कर ऎसा लग रहा था। की प्रिंसिपल ने डंडा स्पेशल मारने के लिए बनवाया या खरीदा होगा। प्रिंसिपल ने बिना मेरी बात सुने एक हाथ पकड़ कर दे डंडा - दे डंडा पिटने लगा मैने कहा से मेरी बात तो सुन लीजिए लेकिन प्रि

20/07/2020. P/104

हिन्दी/ /////// एक दिन की बात है हम क्लास के सभी लडके मस्ती कर रहे थे क्योंकि पी. टी. का पीरियड था। लगभग सभी विद्यार्थी खेल के मैदान में चले गए में , विवेक और दीपक , दिलीप ,भोला , संजय, हेमन्त, जय प्रकाश, प्रदीप, और भी कुछ लडके थे। खिड़की से बाहर रोड पर को भी जा रहा था आसानी से देखा जा सकता था। पास के स्वामी श्रद्धा नन्द विश्व विद्यालय में पड़ने वाले स्टूडेंट भी रोड से जा रहे थे। तभी एक बोलेरो गाड़ी आके रोड के साइड में रूकी उसमे से एक गर्ल्स बाहर निकली और एक लड़का भी बाहर निकला तभी किसी ने  जोर से चिल्लाया बहुत मस्त माल है। कितने में चलती है ये बोलकर वो बैठ गया। तभी गाड़ी से एक ४० -५० साल की उम्र का आदमी निकला तभी कोई चिल्लाया साला बूढ़ा भी जवानी के मज़े ले रहा है। वो आदमी गुस्से में आ गया। और बोला कमीनों वहीं रुको में अभी आता हूं। इतना सुनते ही जितने भी क्लास में लडके थे सारे भाग गए। मै नहीं भागा मुझे लगा कि वो वैसे ही बोल रहा होगा। और  मै बैठ कर अपनी साइंस कि कॉपी निकाल कर अभ्यास के प्रशन उत्तर करने लगा। कि ही देर बाद वो अधेड़ उम्र का आदमी अपने साथ ४ बॉडी बिल्डर लेकर आया और साथ में व

17/07/2020. P/103

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हिन्दी/ /////// त्रिलोक सर का खौफ इतना था कि कई लडको ने सेक्शन बदलने के लिए प्रिंसिपल को प्राथना पत्र दिया और सेक्शन चेंज भी कर लिया उनको देख कर और भी लडको ने सेक्शन बदलने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। ये बात त्रिलोक सर को अच्छी नहीं लगी उन्होंने कहा तुम कोई सा भी सेक्शन चुन को तुम लोगो की कॉपी मै ही चेक करुगा और गलत दिखा तो अंक जरूर काटूगा। अगर लिखावट सुंदर हुई तो उसके दो अंक दे दुगा। एक बार एक लडके ने एग्जाम कॉपी में सायिरी लिखी थी। तो त्रिलोक सर ने उसे प्राथना के समय पूरे स्कूल वालो को सुनाया। और उस को सरमिंदा किया ताकि वो भविष्य में कोई और गलती ना करे और पढने लगे। एक लडके ने लिखा था। गाय हमारी माता है हमको कुछ नहीं आता है। तो त्रिलोक सर ने लिखा बैल तुम्हारा बाप है। नंबर देना पाप है। वो हमेशा देश हित में बात किया करते थे। किसी लडके को जानबूझकर फेल नहीं करते थे। वो ठीक उत्तर पर ही नंबर देते थे। एग्जाम के बाद कॉपी सभी को दिखाते और बोलते कि अगर तुम्हे लगे कि मैंने किसी उत्तर पर कम नंबर दिया है तो मुझे बताओ और दिखाओ यदि मुझे लगा कि मैंने कम नंबर दिया है और तुम्हारा उत्तर ठीक है तो मै तुम्

15/07/2020. P/102

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हिन्दी/ /////// आज मै मेरे स्कूल के सबसे खतरनाक टीचर के बारे में बताने जा रहा हूं। टीचर का नाम त्रिलोक सिंह था। स्कूल का सबसे कठोर और टाइम का पाबन्नद सभी विद्यार्थी त्रिलोक सर से खौफ खाते थे। जिस किसी क्लास में उनका पीरियड लग जाता उस क्लास के सभी विद्यार्थियों को तो साफ़ सुघ जाता त्रिलोक सर की क्लास कोई भी बंक नहीं करता। त्रिलोक सर को कॉपी से ज्यादा मौखिक पढाने का शौक था एक बार किताब का शीर्षक देख लेते तो किताब डेस्क पर रख देते और पूरी किताब में क्या - क्या है उसके बारे में विस्तार से बताते अगर किताब के चैप्टर से जुड़ी कोई कहानी भी होती तो ओ जरूर बताते त्रिलोक सर के पीरियड में ५ मिनट की देर से पहुंचे तो क्लास में नहीं घुसने पाओगे इतिहास और राजनीति उनका विषय था। जो क्लास में पढाते वही एग्जाम पेपर में भी पूछते जैसा उन्होंने पढाया है। वैसा ही उत्तर वो चाहते थे। नकल करने के सख्त विरोधी थे। और उन टीचरो के सख्त खिलाफ थे जो थोड़ा बहुत हिंट बता देते थे कि एग्जाम में क्या आयेगा। एग्जाम पेपर के उत्तर शीट के एक - एक शब्द को पढ चेक करते थे। मात्रा में भी गलती होने पर नंबर काटते थे। अगर किसी ने उत्

13/07/2020. P/101

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हिन्दी/ /////// कई लडके उस लड़की के मां के हाथों पिट चुके थे। लेकिन दिलीप फिर भी उस लड़की के पीछे पड़ा था। हेमन्त , हमेशा ग्राउंड में खेलता रहता था। चन्द्र प्रकाश हमेशा दूसरे दिन बंक हमारे क्लास का मोबाइल मेन जगदीश था। जगदीश हर महीने न्यू मोबाइल लाता था। और सभी क्लास के लडको को दिखाता था। जय प्रकाश पढाई में होसियार था। और मै तो आलसी था हमेशा शनिवार की छुट्टी करता था। और रविवार कि छुट्टी तो होती ही थी। इसलिए सर हमेशा मुझे एक के साथ एक फ्री छुट्टी मारने वाला कहते थे। हमारे मैथ के टीचर राजीव सर थे। दिखने में ही खतरनाक और मैथ के साथ तो साक्षात् यमराज लगते थे। मैथ में उनसे कुछ भी पूछ लो और दूसरे मैथ के टीचर थे कुंडू सर दुर्घटनग्रस्त होने के कारण कुंडू सर थोड़ा बच्चो जैसा बरताव करते थे लेकिन मैथ समझने और पढाने में सबसे बेस्ट थे उनसे सवाल पूछने बाहर कोचिंग के टीचर आते थे। जो और स्टूडेंट के लिए कोचिंग क्लास खोलते थे। मेरी क्लास के बहुत से विद्यार्थी बाहर कोचिंग पड़ते थे। प्रवीण सर घर का गुस्सा हम विद्यार्थियों पर निकलते थे बिना गलती के ही खड़ा क्लास में खड़ा करना और किसी दूसरे दिन कि गलती य

10/07/2020. P/100

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हिन्दी/ /////// कुछ कमिने जो छूट गए थे। उनकी स्टोरी शुरू क्लास मॉनिटर से करते है। नाम प्रदीप अलीपुर का रहने वाला मेन घर विहार में है किसी के भी ग्रुप में मिल जाना और अपना काम निकाल लेना स्कूल के लगभग सभी टीचर जानते थे। क्योंकि प्रदीप हर टीचर का काम करता रहता था। अजय क्लास का सबसे लंबा लड़का साइज में था इससे बड़ा कोई क्लास में ही नहीं था। प्रदीप के साथ ही मज़े लेता था। विवेक क्लास का सबसे बदनाम लड़का हर काम में आगे सिर्फ पढाई को छोड़कर क्लास में सबसे ज्यादा खुराफाती क्लास के खिड़की पे खड़े होकर गर्ल्स को आवाज देकर बुलाना इल्जाम हमेशा दूसरों पर थोपना। भोला लड़ाई में आगे टीचर का दिया हुआ कोई भी काम नहीं करना किसी दूसरे लडके कि कॉपी देखने के बहाने लेकर टीचर से चेक कराना दिन भर गर्ल्स के बारे में बाते करना। दीपक बॉली बॉल खेलने वाला सरिफ़ लेकिन अगर कहीं लड़ाई हो रही हो तो उसे देखने जरूर जाना चाहे कोई सा भी काम कर रहा हो छोड़ देगा। संजय होम का टीचर के नजर में न आना ज्यादा तर टीचर संजय को क्लास में न आने के बारे में उठाते थे लेकिन जब विद्यार्थी बताते की ये रोज स्कूल आता है तो टीचर छोड़ देते

08/07/2020. P/99

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हिन्दी/ /////// होम से बहुत से लडके उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्रवेश लिया था। राजेश ,चिमा , रमेश ये सब भाग गए स्कूल से लगभग ६ थ क्लास पास होते - होते मेरे क्लास में होम के सिर्फ मै और संजय बचे थे। क्लास की लास्ट डेस्क पर  हम लोगो का कब्जा होता था। अगर कोई बैठा भी होता तो वो उठ जाता क्योंकि संजय और दीपक पूरे क्लास में अपनी चलाते थे। क्लास में मॉनिटर प्रदीप को बनाया गया प्रदीप अलीपुर का रहने वाला था। प्रदीप, मेरा और दीपक और संजय की हाजिरी लगा देता था। क्योंकि हम लोग हमेशा क्लास में ही रहते थे। जिस दिन नहीं रहते प्रदीप को बोलते कि हम बंक कर रहे है प्रदीप हाजिरी लगा देता अगर क्लास में टीचर नहीं होते तो या टीचर प्रदीप को बोल कर जाते कि हाजिरी लगा देना हम भी प्रदीप को सपोर्ट करते थे। उसके हा में हा मिलते थे। हम क्लास वाले भी आपस में बहुत झगड़ते थे। लेकिन अगर कोई और सेक्शन का या किसी और क्लास के साथ झगड़ा होता तो सभी एक हो जाते थे। टीचर आके कितना भी पूछे कि झगड़े में कौन - कौन सामिल था तो कोई नहीं बताता चाहे टीचर पूरी क्लास को ही सजा दे - दे लेकिन कोई नहीं बताता स्कूल में तो लडको के नाम

06/07/2020. P/98

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हिन्दी/ /////// अलीपुर होम के पुराने लडको ने जिसका नाम अजय था। उसने बताया कि एक दिन की बात है। होम के लडके स्कूल से होम आ रहे थे। रास्ते में एक दुकानदार वाला अमरूद बेच रहा था। एक लडके ने एक रुपए का अमरूद मागा तो दुकानदार ने उस लडके को गली देके बोला भाग जा यहां से उसने सभी लडको को आवाज लगाया की था फ्री में अमरूद मिल रहा है। फिर क्या था सभी लडके उसके दुकान पर टूट पड़े उसकी दुकान देखते ही देखते खाली हो गई करीब ७० लडके थे। हर लडके ने अमरूद के साथ दुकान दार जो और फल बेच रहा था ओ भी उठा लिया था हर लड़का अपनी जेब व बैग फल से भर लिया था इतना ही नहीं लडके इतने चालाक थे। की सभी फलो को थोड़ा - थोड़ा खा लिया था जिससे केयर टेकर कोई फल वापस नहीं ले सके क्योंकि जूठा फल न तो दुकानदार लेता न ही ग्राहक केयर टेकर ने कुछ भी नहीं कहा लडको को क्योंकि अगर दुकान वाला एक अमरूद भी दे देता तो इसकी दुकान नहीं लुटती एक अमरूद के चक्कर में पूरी दुकान लूटवा बैठा दुकान दार पुलिस स्टेशन गया तो पुलिस वालो ने इसे समझाया की भाई जो हो गया सो हो गया अब सावधानी रख और एक दो फल किसी को देने से तेरा घाटा नहीं हो जाएगा पर दुक

04/07/2020. P/97

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हिन्दी/ /////// होम से बहुत से लडके बाहर स्कूल में पड़ने जाते थे। लेकिन ज्यादा तर लडके अपना नाम स्कूल में इसलिए लिखवाते थे। ताकि स्कूल से भाग सके क्योंकि स्कूल से भागना आसान था। लेकिन सिर्फ सिर्फ ६ थ क्लास से उपर पढने वाले के लिए क्योंकि ६ क्लास से या उपर पढने वाले लडके जब भागते थे तब उन्हें कोई ढूंढने नहीं जाता सिर्फ एक एफआईआर थाने में एक एफआईआर की फोटो कॉपी फाइल में लगा दिया जाता और एक वीक के बाद फाइल बंद कर दिया जाता स्कूल से भागने वालों बहुत से लडके थे जिनमें से कुछ के नाम रमेश, चिमा, जनोला इन्हीं के नाम याद रह गया। अलीपुर होम में रहने वाले पुराने लडके बताते थे कि प्राईमरी स्कूल में पड़ने वाले होम के लडके इतने शैतान थे कि रास्ते में पड़ने वाले दुकान दारो के समान उठा लिया करते थे। और दुकान दार कुछ कर भी नहीं पाते थे क्योंकि होम वालो ने दुकान वालो को पहले ही बता रखा था। की भाई ये सभी कस्टडी में ( पागल खाने ) में रहते है तेरा माल भी जाएगा और केस भी नहीं बनेगा पुलिस वाले भी नहीं सुनेंगे कई दुकान वालो की दुकान होम के लडको ने लूट लिया पुलिस थाने में एफआईआर लिखाने गए तो तो पुलिस वालो न

02/07/2020. P/96

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हिन्दी/ /////// ६वी क्लास पास करने के बाद हमारी क्लास रूम चेंज हो गया। हम लोगो को करनाल रोड के साइड में जो क्लास सेकेंड फ्लोर पर थी। ओ दे दी गई। मेरी क्लास में सबसे शैतान लडको में विवेक, अमन , अजय , प्रदीप, ये मेन थे करीब आधी क्लास के लडके और थे जो इसी नीचे आते थे। हमारी क्लास की खिड़की से रोड दिखता था ओ भी सिर्फ तीस या चालीस मीटर दूर होगा। रोड के साइड में कीकर के पेड़ थे। जिनके नीचे रोड पर चलने वाले बैठ के अपनी थकान मिटाते थे। हमारे स्कूल के सामने ही गर्ल्स स्कूल भी था। गर्ल्स कि सुबह में क्लास ७:३० से १:३० तक होता था। जब गर्ल्स कि छुट्टी होती थी। तो गर्ल्स उसी रोड से गुजरी थी तब सारे लडके खिड़की से उनको नाटी, मोटी , छोटी, डार्लिंग, लमकी, आदि केहके चिल्लाते थे। और गर्ल्स को चिढ़ाते थे। लेकिन गर्ल्स भी पीछे हटने वाली नहीं होती थी। वो भी लडको को फलाईग किस देकर चिढ़ाती थी कभी - कभी तो आई लव यू केहके चिल्लाती थी। तो कभी - कभी गंदी - गंदी गालियां भी देती थी। लेकिन स्कूल के लडके कहा मानने वाले थे। उन्हें तो गर्ल्स के मुख से गंदी गली भी अच्छी लगती थी। जब लडको को चिल्लाते हुए टीचर पकड़ लेत