04/08/2020. P/110

हिन्दी/
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अलीपुर होम दूसरे होम से मेरा ट्रान्सफर अलीपुर के पहले होम में हो गया। पहले होम में जानें के दो हमने के बाद मेरी लड़ाई हो गई जिसकी वजह से मेरी एक आंख काली हो गई बिलकुल पिक्चर्स में जैसा होता है। होम में एक ग्रुप आया (शोकेंदा ) जो कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के अपनी एक ब्रांच अलीपुर होम में खोलना चाहते थे। और होम के लडको को कंप्यूटर हारडवेयर और सॉफ्टवेयर सीखना चाहते थे। शौकीन वालो को इजाजत मिल गई उन्हें स्टडी के लिए एक कंप्यूटर हॉल दे दिया गया जिसमें वे अपने साथ लाए कंप्यूटर और उसके पार्ट रख सकते थे। कुछ दिनों बाद कंप्यूटर क्लास स्टार्ट हो गई कुछ मैंने भी उसमें एडमिशन ले लिए कंप्यूटर डिप्लोमा एक साल का था। कई लड़कों ने क्लास छोड़ दिया लेकिन मै क्लास रोज लेता था। एग्जाम होने के बाद रिजल्ट आया जिसमें मेरे ५१ परसेंट आए थे। मै तो पास हो गया इसी बात की खुशी मना रहा था। क्योंकि कंप्यूटर हार्डवेयर तो समझ लेता था लेकिन कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में सारा ज्ञान सर के ऊपर से निकल जाता था। कुछ समझ में नहीं आता था और मै पड़ता भी नहीं थे। लेकिन एग्जाम में जब प्रैक्टिकल हुआ था जिसमें एक कंप्यूटर असंबल करना था और उसके पार्ट अलग - अलग पार्ट के साथ मिक्स करके रखा गया था मैंने में कंप्यूटर के सभी पार्ट असेंबल किया और कंप्यूटर ऑन हो गया। ये चमत्कार कैसे हुआ मुझे भी समझ में नहीं आया।











English translate/
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 Alipore Home My transfer from second home to first home in Alipore.  In the first home, know that after two, I had a fight, due to which my one eye turned black, exactly like in pictures.  A group came to the home (Shokenda) who wanted to open one of their branches in computer hardware and software at Alipore Home.  And wanted to learn the computer hardware and software for the home boys.  The enthusiasts got permission, they were given a computer hall to study in which they could keep the computer and its parts brought with them.  A few days later, the computer class started, I took a computer diploma for one year.  Many boys left class but I used to take class everyday.  After the exam, the result came in which my 51% had come.  I have passed, I was celebrating this thing.  Because computer hardware was understandable, but all the knowledge in computer software was passed over the head.  I did not understand anything and I did not even understand.  But when it was practical in the exam in which a computer had to be disassembled and its parts were mixed with different parts, I assembled all the parts of the computer and the computer turned on.  I did not even understand how this miracle happened.












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